Sunday, November 29, 2009

देश के महान शहीद

वो जन्म लेते है जिस ज़मीं पर उसी के लिए मर जाते है....
अपने घरवालो को छोड़कर वतन की रक्षा करते रहते है.....
ना परवाह है उनको अपनी जान की वो तो हमारे लिए मर जाते है..
और कोई नहीं दोस्तों वो एक महान देश के महान शहीद कहलाते है.........

शर्दी हो या गर्मी वो तो सिर्फ हमें बचाते है..
ना मिले कुछ भी खाने को तो सिर्फ चने भी खाते है.
जग रहे है वो बॉर्डर पर और हमें चैन की नींद दिलाते है...
और कोई नहीं दोस्तों वो देश के महान शहीद कहलाते है...

पंजाब हो या कश्मीर उनके लिए सब एक कहलाते है..
आतंकवाद और नक्सलवाद से हमें बचाते है........
लड़ना पड़े तो लड़ जाते है वर्ना अड़ जाते है..
और कोई नहीं दोस्तों वो एक महान देश के महान शहीद कहलाते है.........

आज मलय करता है सलाम उन शहीदों को
हमारे लिए कारगिल जैसी जगह को बचाते है..
संसद और ताज होटल जैसी घटना ना हो बारबार
इस लिए वो शहीद हो जाते है.....इसी लिए दोस्तों
वो इस महान देश के महान शहीद कहलाते है .....

Monday, September 21, 2009

जबतक आप बुराई को दूर नही करते या उसे दूर करने का प्रयास नही करते , तबतक आपको उस बुराई को बुराई कहने का कोई हक़ नही है....

हम तीन दोस्त कोटा की रेलवे कालोनी में हर शाम की तरह घूमने निकले..
हम एक सड़क पर जा रहे थे, वहां दो रोड लाइटों के बीच में एक गतिरोधक था । हम अपनी बातों में व्यस्त थे , अचानक एक इनफिल्ड मोटर साईकिल पर सवार नवयुवक वहां से गुजरा । कुछ पल बाद पीछे से आवाज आई, हमने मुड़कर देखा तो वो मोटर साईकिल सवार गिरा पड़ा था । हम दौड़कर वहां गए और उसे उठा लिया । हमारे पूछने पर उसने बताया कि गतिरोधक उसे दिखाई नही दिया और संतुलन बिगड़ने से वो गिर गया पर उसे कही भी चोट नही आई

हममें से एक लड़का बोला कि ,"अरे यार गतिरोधक पर सफेदी भी नही है " ।
वो मोटर साईकिल सवार नवयुवक बोला, "अरे छोड़ो यार वैसे भी अपने देश ने बहुत समस्याएं है एक और सही । "
यह सुनकर मेरा दिमाग ख़राब हो गया मै लगभग चिल्लाता हुआ बोला ,"हे !! जानते हो ये समस्याये क्यों है ? क्योंकि हम उन्हें पैदा करते है , यह बोलना तो बहुत आसान है कि यहाँ बहुत समस्याएं है कभी उन्हें दूर कराने के बारे में सोचा है ?? याद रखो मेरे दोस्त, यदि हम समाधान का हिस्सा नही है तो समस्या का हिस्सा है । मैं कल रात इसी समय सफेदी और ब्रुश लेकर आऊंगा इस गतिरोधक पर करने, क्या तुम आओगे मेरे साथ ???"
वह खामोशी से मेरी तरफ़ देखता रहा, थोडी देर सोच कर बोला कि हाँ मै आ जाऊंगा ।

अगली सुबह १०:०० बजे मै रेलवे ऑफिस में गया वहां जाकर सारी बात बताई तो वहां के अधिकारी श्री गुप्ता जी बोले, "बेटा, तुम अर्जी लगा दो हम सफेदी करावा देंगे ।"
मै बोला ,"नही श्रीमान मुझे आज रात को ८.०० बजे सफेदी करनी है, मैने वादा किया है । यदि आप नही करते तो मुझे सामान बता दीजिये मै ख़ुद बाज़ार से खरीद कर कर लूँगा । "
काफी जिदोजेहद के बाद वो मान गए । मेरी बात मानकर रात के ८.०० बजे कर्मचारियों को सफेदी करने के लिए भेजा जबकि उनका समय तो ५.३० पर ही समाप्त हो जाता है । लेकिन वो युवक नही आया जो वहां गिरा था, जिसका हमे इंतजार था ... ।

इतना ही नही अगले एक सप्ताह मै सभी गलियों के गतिरोधकों पर सफेदी हो गई थी ।

इस घटना से मेरी विचारधारा और प्रबल हो गई की ,"जबतक आप बुराई को दूर नही करते या उसे दूर करने का प्रयास नही करते , तबतक आपको उस बुराई को बुराई कहने का कोई हक़ नही है ।"

Tuesday, August 4, 2009

उनकी बहादुरी का भुगतान क्या करेगा कोई, उनकी शहादत का कर्ज देश पर उधार है....

एक सैनिक की चिट्टी आई, एक सैनिक की चिट्टी !
एक सैनिक की चिट्टी आई आज उसके गाँव में,
जैसे धुप उजाला लेके पहुँच गई वो छांव में!

माँ ने दौड़ के ले ली चिट्टी, जब की नहीं थी पढ़ी लिखी,
बोली कोई पढ़ के सुनाओ बेटा तो नहीं है दुखी
बचपन में जब पड़ता था जरा से गिले बिस्तर में,
माँ गिले में सो जाती थी उस बच्चे के चक्कर में!

जाने कितनी ठंडक होगी उस बर्फीली घाटी में,
जाने कैसे सोता होगा लाल मेरा वो माटी में!
इतनी जल्दी चला गया वो दे न सकी कुछ भी उसको,
बस खडी देखती रही एकटक उसको,

तेरा कुशलता जान में लेती, मन दिल को समझता है
जब तेरे हिस्से का खाना रोज़ रोज़ बच जाता है

सारा गाँव हाल युद्घ का जब हमको बतलाता है,
तेरी बढ़ाई सुन सुन के सीना चौडा हो जाता है

पढ़ने को जब चिट्टी खोली, गम का कोई तूफान चला
ऐसी खबर लिखी थी उसमे उसको पड़ता कौन भला,
सब के चहरे धुँआ धुँआ थे जैसे दिल हो कोई जला!

तभी अचानक एक पडौसन ने उसको बतलाया,
चीख उठी वो ममता पागल हाल ने था उसको बहकाया,

कुछ नहीं समझ पाई वो बहीन बहुत छोटी थी,
राखी उसने खुद ही बनाई और बक्से में छिपा दिया,
बोली जब पहना दूंगी कितने खुश होंगे भैया,
उसकी ये सारी बाते उसकी गुडिया से ही होती थी!

उसे देखा वो बूढी माँ फूट फूट के रोटी थी,
सोचती थी कैसे कह दूं तेरे सपने कभी नहीं सँवर पाएंगे
अब तुझसे राखी बंधवाने तेरे भैया कभी नहीं आयेंगे
तेरे भैया कभी नहीं आयेंगे ! तेरे भैया कभी नहीं आयेंगे !!!